प्रेम का अनजाना सफर: दूसरा भाग |
सुबह की रोशनी खिड़की से आकर आरुषि के चेहरे पर पड़ी। आकाश अभी सो रहा था, उसकी बाँह उसकी कमर पर टिकी हुई थी। उसने धीरे से उठकर उसे देखा—उसके बाल बिखरे हुए, होंठों पर हल्की मुस्कान। एक पल को उसे लगा जैसे वह किसी सपने में जी रही हो। वह जानती थी कि बाहर की दुनिया में उसे सिर्फ एक Pune Call Girl या Pune Escort Girl के रूप में देखा जाता था। लेकिन यहाँ, इस कमरे में, वह सिर्फ आरुषि थी—एक औरत जो प्यार में पड़ गई थी।
आकाश की आँखें खुलीं। उसने उसे देखा और मुस्कुराया। "सुबह-सुबह इतना गौर से क्या देख रही हो?"
"तुम्हें," उसने कहा, अपनी उँगलियाँ उसकी छाती पर फेरते हुए। "मैं सोच रही थी... कल रात सब कुछ इतना खूबसूरत क्यों था?"
आकाश ने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके माथे पर चुंबन लिया। "क्योंकि यह सच था। तुम और मैं, बिना किसी दिखावे के।"
वह उठा और चाय बनाने लगा। आरुषि ने चादर में लिपटे हुए किचन के दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया। उसने उसकी ओर देखा—नंगे शरीर पर सिर्फ चादर, बाल अस्त-व्यस्त, आँखों में चमक। वह किसी भी Call Girl in Pune से कहीं ज्यादा खूबसूरत लग रही थी, क्योंकि वह असली थी।
"आज क्या प्लान है?" उसने पूछा।
"तुम्हारे साथ रहना," आकाश ने कहा, चाय का कप उसकी तरफ बढ़ाते हुए। "लेकिन पहले, मैं कुछ कहना चाहता हूँ।"
उसने चाय का घूँट भरा और गंभीरता से उसकी ओर देखा। "बोलो।"
"मैं जानता हूँ कि तुम्हारा काम क्या है। मैंने सुना है कि Pune Call Girls Services के बारे में बहुत सारी बातें होती हैं—कुछ सच, कुछ झूठ। लेकिन मैं तुमसे उस नज़र से नहीं देखता। मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे साथ रहो, सिर्फ मेरी। क्या तुम... अपना काम छोड़ सकती हो?"
आरुषि की आँखें नम हो गईं। उसने अपने पेशे को कभी शर्म की बात नहीं समझा था—वह जानती थी कि Escort Services in Pune के जरिए वह अपनी ज़िंदगी चला रही थी, परिवार को पैसे भेज रही थी। लेकिन यहाँ कोई उसे उसके काम से बाहर देख रहा था। उसने आकाश का हाथ पकड़ लिया।
"मैं कोशिश कर सकती हूँ," उसने धीरे से कहा। "लेकिन मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। मेरी माँ बीमार है, छोटी बहन की पढ़ाई चल रही है... मैं कुछ और नहीं कर सकती।"
आकाश ने उसे गले लगा लिया। "तो मैं तुम्हारा रास्ता बनूँगा। हम मिलकर कुछ नया शुरू करेंगे।"
तीन हफ्ते बीत गए। आकाश और आरुषि हर दिन मिलते थे। वह अपने ग्राहकों को मना कर रही थी, सिर्फ अपने लिए समय निकाल रही थी। लेकिन पैसों की कमी उसे परेशान कर रही थी। एक दिन, उसके पास एक पुराने ग्राहक का फोन आया—एक अमीर व्यापारी जो हमेशा उसकी सेवाओं के लिए अच्छी रकम देता था।
"आरुषि, मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है। आज रात को होटल में मिलो। मैं पाँच हज़ार दे दूँगा," उसने कहा।
आरुषि का दिल धड़क गया। उसे पैसों की सख्त ज़रूरत थी—माँ की दवा का बिल बाकी था। लेकिन आकाश का चेहरा उसकी आँखों के सामने आ गया। उसने कहा, "नहीं, अब मैं यह सब नहीं करूँगी। मुझे माफ कर दीजिए।"
लेकिन उस रात, जब आकाश काम से लौटा, तो उसने आरुषि को रोते हुए पाया। उसने सारी बात बताई। आकाश ने उसे चुप कराया और कहा, "हम साथ हैं। मैं अपनी नौकरी से तुम्हारी माँ का इलाज करवा सकता हूँ। तुम्हें किसी और के पास जाने की ज़रूरत नहीं।"
उस रात, उनके बीच की ज़रूरत और गहरी हो गई। आरुषि ने महसूस किया कि यह पहली बार था जब उसे किसी ने बिना शर्त के प्यार किया। वह अपने अतीत को भूलकर एक नई शुरुआत करना चाहती थी।
एक शाम, आकाश ने उसे एक छोटे से रेस्टोरेंट में ले जाकर खाना खिलाया। फिर वे उसके फ्लैट लौटे। कमरे में अंधेरा था, सिर्फ मोमबत्ती जल रही थी। आरुषि ने अपने कपड़े उतारे—पहले साड़ी, फिर ब्लाउज। उसका शरीर मोमबत्ती की रोशनी में चमक रहा था, त्वचा पर पसीने की बूँदें।
आकाश ने उसे बिस्तर पर लिटाया और अपने होंठों को उसकी गर्दन पर दबाया। उसकी जीभ धीरे-धीरे नीचे उतरती गई, उसके स्तनों के बीच से होते हुए नाभि तक। आरुषि ने अपने हाथों से उसके बाल पकड़ लिए और एक गहरी साँस ली।
"आज मैं तुम्हारी हूँ, सिर्फ तुम्हारी," वह फुसफुसाई।
आकाश ने उसकी जाँघों के बीच अपनी उँगलियाँ घुमाईं, वहाँ की गर्मी को महसूस किया। उसने धीरे-धीरे उसकी चूत को सहलाया, जब तक वह पूरी तरह भीग नहीं गई। फिर उसने अपना लंड अंदर डाला, धीमी लय में, एक-एक इंच उसके अंदर घुसता हुआ।
आरुषि की आँखें बंद हो गईं। उसने अपने हाथों से उसकी पीठ पकड़ ली, जब वह उस पर थ्रस्ट कर रहा था। उसकी हर साँस एक आह में बदल गई। "और... और...," वह बुदबुदाई।
आकाश ने गति बढ़ाई। उसके शरीर पर पसीना चमक रहा था, उसकी मांसपेशियाँ तन रही थीं। वह उसके अंदर गहराई तक पहुँच गया, जब तक कि वह चरम पर नहीं पहुँच गई। उसकी चीख़ कमरे में गूँजी, और फिर वह उसके ऊपर गिर गया, दोनों का शरीर एक साथ काँपता रहा।
बाद में, जब वे एक-दूसरे की बाँहों में लिपटे थे, आरुषि ने कहा, "मैंने फैसला कर लिया है। मैं यह सब छोड़ दूँगी। Call Girls Services in Pune या Escort Services in Pune—यह सब मेरा अतीत है। मैं अपना भविष्य तुम्हारे साथ बनाना चाहती हूँ।"
आकाश ने उसके माथे पर चुंबन किया। "हम साथ हैं। और कोई भी चीज़ हमें अलग नहीं कर सकती।"
लेकिन असली दुनिया में, हर कहानी इतनी आसान नहीं होती। अगले दिन, आरुषि के एक पुराने ग्राहक—एक पुलिस वाला—ने उसे फोन किया। वह धमकी दे रहा था, उसे Escorts in Pune के नेटवर्क में वापस लाने के लिए। आरुषि डर गई। उसने आकाश को सब बताया।
आकाश ने उसे मजबूती से गले लगाया। "हम इससे भी लड़ेंगे। तुम अकेली नहीं हो।"
उस रात, वे दोनों एक नए संघर्ष के लिए तैयार थे—एक ऐसा संघर्ष जो सिर्फ बाहरी दुश्मनों से नहीं, बल्कि समाज की नज़रों और अपने अंदर के डर से भी था। लेकिन वे साथ थे, और यही सबसे बड़ी ताकत थी।
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