पुणे की प्रेम कहानी – भाग 5
पुणे की सुबह हमेशा की तरह हल्की ठंडक और कॉफी की महक से भरी हुई थी। राहुल की आँखें खुलीं तो सबसे पहले प्रिया का चेहरा याद आया। कल रात का वो लंबा वॉक, कोरेगांव पार्क की उन गलियों में हाथों में हाथ डाले घूमना, और फिर अचानक हुई बारिश में भीगते हुए हँसना—सब कुछ सपने जैसा लग रहा था। लेकिन आज सुबह की धूप में सब कुछ थोड़ा अलग महसूस हो रहा था। राहुल ने फोन उठाया। स्क्रीन पर प्रिया का मैसेज पहले से ही चमक रहा था: “गुड मॉर्निंग मिस्टर आर्किटेक्ट। आज ऑफिस में देर मत करना। शाम को मुलाकात तय है ना? 💕” उसके होंठों पर मुस्कान आ गई। तीन महीने पहले जब वो मुंबई से पुणे शिफ्ट हुआ था, तब उसे नहीं पता था कि ये शहर सिर्फ आईटी हब और वडापाव ही नहीं, उसकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत प्यार भी देगा। प्रिया उस समय एक छोटे एनजीओ में काम करती थी, जो पुणे के आसपास के गांवों में लड़कियों की शिक्षा पर काम करता था। उनकी पहली मुलाकात ‘पुणे फेस्टिवल’ के दौरान हुई थी। राहुल स्टेज पर एक सस्टेनेबल आर्किटेक्चर पर बोल रहा था और प्रिया ऑडियंस में बैठी थी। उसके सवाल इतने तीखे और सार्थक थे कि राहुल का पूरा फोकस बिगड़ गया थ...