पुणे की प्रेम कहानी – भाग 2
राहुल की कार पुणे के घुमावदार रास्तों पर धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। बाहर हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी और कांच पर पानी की बूँदें फिसल रही थीं। मीरा बगल की सीट पर बैठी थी, उसका दिल अभी भी पिछली रात की यादों से भरा हुआ था। राहुल ने एक हाथ स्टियरिंग पर रखा था और दूसरा कभी-कभी मीरा के हाथ को छू जाता था।
"रात को सो नहीं पाई?" राहुल ने मुस्कुराते हुए पूछा।
मीरा ने सिर हिलाया। "नहीं। तुम्हारी बातें बार-बार याद आ रही थीं।"
राहुल ने कार को एक शांत मोड़ पर रोक दिया। बाहर घना जंगल और कोहरे से ढकी पहाड़ियाँ नज़र आ रही थीं। वह मीरा की ओर मुड़ा और उसके गाल को धीरे से छुआ।
"आज हम कहीं दूर ले चलूँ?"
मीरा ने हाँ कहा। कार फिर से चल पड़ी। कुछ देर बाद वे एक पुराने बंगले के सामने रुके। बंगला जंगलों से घिरा हुआ था, अंदर जाने पर लकड़ी की फर्श और पुरानी लालटेनें नज़र आईं। राहुल ने मीरा का हाथ थामा और उसे ऊपर की मेजेनाइन मंजिल पर ले गया। वहाँ एक बड़ा बिस्तर था, जिसके चारों तरफ मोमबत्तियाँ जली हुई थीं।
मीरा ने राहुल की शर्ट के बटन खोले। उसकी उँगलियाँ राहुल की छाती पर फिरने लगीं। राहुल ने मीरा की साड़ी का पल्लू खींचा और उसे फर्श पर गिरा दिया। मीरा की गोरी त्वचा नंगी हो गई। राहुल ने उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाया और मुंह में लेकर चूसा। मीरा की साँस तेज़ हो गई।
"राहुल... और जोर से," मीरा ने फुसफुसाया।
राहुल ने मीरा को बिस्तर पर लिटाया। उसने मीरा की जांघें खोलीं और अपनी जीभ से उसके स्तनों के नीचे से लेकर नाभि तक चूमा। फिर उसने मीरा की जांघों के बीच मुंह लगाया और उसकी जीभ को अंदर डालकर चाटने लगा। मीरा की कमर ऊपर उठने लगी।
"आह... हाँ..." मीरा की आवाज़ भर गई।
राहुल ने अपनी पैंट उतारी। उसका लिंग खड़ा हो चुका था। उसने मीरा की जांघों को और चौड़ा किया और अपने लिंग को मीरा की चूत में धीरे-धीरे घुसाया। मीरा ने राहुल की पीठ को नाखूनों से खरोंचा। राहुल ने जोर-जोर से धक्के मारे। हर धक्के के साथ मीरा की सिसकारियाँ बढ़ती गईं।
"मीरा... तू बहुत गर्म है," राहुल ने कहा।
वे दोनों पसीने से तर हो चुके थे। राहुल ने मीरा को उल्टा कर दिया और उसके पीछे से घुसा। मीरा का गोल और नरम नितंब उसके हाथों में था। राहुल ने जोर से थप्पड़ मारा और फिर तेज़ी से चोदने लगा। मीरा की चीखें पूरे बंगले में गूँज रही थीं।
राहुल ने मीरा को फिर सामने की तरफ घुमाया। उसने मीरा के स्तन चूसते हुए उसके मुँह में अपनी जीभ डाली। दोनों की साँसें एक हो गईं। राहुल ने अंत में जोर से धक्का मारा और अपना वीर्य मीरा की चूत के अंदर छोड़ दिया। मीरा भी जोर से काँप उठी।
वे दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। कुछ देर बाद मीरा ने राहुल की छाती पर सिर रखा।
"यह जगह बहुत खास है," मीरा ने कहा।
राहुल ने उसके बालों में उँगलियाँ फिराईं। "तुम्हारे लिए ही चुनी है।"
बारिश अब जोर से हो रही थी। बंगले के बाहर पेड़ों की पत्तियाँ हिल रही थीं। मीरा उठी और खिड़की के पास गई। राहुल ने पीछे से उसे पकड़ लिया। उसने मीरा की गर्दन पर चूमते हुए फिर से अपने हाथों को उसके स्तनों पर रखा।
"फिर से?" मीरा ने मुस्कुराते हुए पूछा।
"हाँ," राहुल ने कहा।
वे फिर बिस्तर पर लौट आए। इस बार मीरा ने राहुल को लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गई। उसने राहुल के लिंग को हाथ में लिया और धीरे-धीरे अपनी चूत में उतारा। मीरा ऊपर-नीचे होने लगी। राहुल ने मीरा की कमर पकड़ रखी थी। मीरा के स्तन हिल रहे थे। राहुल ने उन्हें दोनों हाथों से दबाया।
"मीरा... तू बहुत सुंदर है," राहुल ने कहा।
मीरा ने गति बढ़ाई। दोनों फिर चरम सीमा पर पहुँच गए। राहुल ने दूसरी बार अपना वीर्य मीरा के अंदर छोड़ा। मीरा थककर राहुल की छाती पर गिर गई।
रात बीत चुकी थी। सुबह होने में अभी समय था। मीरा ने राहुल से पूछा, "हम यहाँ कितने दिन रहेंगे?"
"जितने दिन तुम चाहो," राहुल ने जवाब दिया।
वे दोनों नंगे ही सो गए। सुबह जब मीरा उठी तो राहुल पहले से जाग चुका था। उसने मीरा को नाश्ता बनाकर दिया। दोनों ने खिड़की के पास बैठकर चाय पी। बाहर कोहरा छँट रहा था।
"राहुल, मुझे डर लग रहा है," मीरा ने अचानक कहा।
"किस बात का?" राहुल ने पूछा।
"अगर कोई जान ले तो?"
राहुल ने मीरा का हाथ थामा। "कोई नहीं जान पाएगा। यह हमारी दुनिया है।"
मीरा ने राहुल को गले लगाया। वे फिर चूमने लगे। राहुल ने मीरा को उठाकर बिस्तर पर ले गया। इस बार उन्होंने धीरे-धीरे प्यार किया। राहुल ने मीरा की पूरी बॉडी को चूमा। मीरा ने राहुल के लिंग को मुँह में लिया और चूसा। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं।
"मीरा... रुक जा," राहुल ने कहा।
मीरा ने मुँह से निकाला और फिर ऊपर चढ़ गई। दोनों फिर एक हो गए।
दोपहर तक वे बिस्तर से नहीं उठे। जब बाहर निकले तो जंगल में घूमने लगे। राहुल ने मीरा को एक पेड़ के पीछे खींचा और फिर से उसके कपड़े उतारे। मीरा ने भी राहुल की पैंट खोली। वे पेड़ के सहारे खड़े होकर चोदने लगे। मीरा की पीठ पेड़ से रगड़ रही थी। राहुल ने जोर से धक्के मारे।
"आह... राहुल..." मीरा की आवाज़ जंगल में गूँजी।
वे वापस बंगले में आए। शाम हो चुकी थी। राहुल ने मीरा के लिए नहाने का पानी गर्म किया। दोनों ने साथ नहाया। राहुल ने मीरा के शरीर पर साबुन लगाया और फिर पानी से धोया। मीरा ने राहुल के लिंग को हाथ में लिया।
"फिर से खड़ा हो गया," मीरा ने कहा।
राहुल ने मीरा को दीवार से टिका दिया और फिर से घुसा। पानी की बौछार के नीचे वे फिर चरम पर पहुँचे।
रात को वे फिर बिस्तर पर लेटे। मीरा ने राहुल से कहा, "मुझे लगता है कि मैं तुम्हें प्यार करने लगी हूँ।"
राहुल ने मीरा को चूमा। "मैं भी।"
वे दोनों फिर एक हो गए। इस बार उन्होंने पूरी रात प्यार किया। हर बार नई मुद्रा आजमाई। मीरा ने राहुल को नीचे लिटाया और उसके ऊपर बैठकर चोदने लगी। राहुल ने मीरा की जांघें खोलीं और जीभ से चाटा। दोनों थककर सो गए।
सुबह जब वे उठे तो बाहर सूरज चमक रहा था। मीरा ने राहुल से पूछा, "अब क्या करेंगे?"
"जो तुम चाहो," राहुल ने कहा।
मीरा ने राहुल को गले लगाया। वे फिर चूमने लगे।
Comments
Post a Comment