पुणे की प्रेम कहानी |
पुणे का वो बरसात का दिन था। मोती बगीचे के पास बैठे आम के पेड़ के नीचे, नेहा और अर्जुन पहली बार मिले थे। नेहा की आँखों में वो चमक थी जो बारिश की बूंदों को भी शर्मसार कर दे। अर्जुन, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, अपनी नई नौकरी के लिए पुणे आया था। वो उस दिन फर्ग्युसन कॉलेज की लाइब्रेरी से लौट रहा था कि अचानक बारिश शुरू हो गई। अपने बैग से निकली किताबों को बचाने के लिए वो उसी पेड़ के नीचे दौड़ा, जहाँ नेहा पहले से खड़ी थी। "मैं... मैं डिस्टर्ब कर रहा हूँ?" अर्जुन ने हिचकिचाते हुए कहा। नेहा मुस्कुराई। "नहीं, ये तो बारिश का प्यार है। आप बैठ सकते हैं।" उन दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, पहले शर्मीली, फिर बेबाक। नेहा बताती गई कि वो यहाँ अपनी दादी के साथ रहती है, उसने अभी-अभी SNDT से ग्रेजुएशन पूरा किया है और अब वो एक एनजीओ में काम करती है। अर्जुन को लगा जैसे वो उसे सालों से जानता है। जब बारिश थमी, तब तक दोनों ने एक दूसरे के फोन नंबर ले लिए थे। उसके बाद के दिनों में वो मिलते रहे। फर्ग्युसन की लॉन में, कमला नेहरू पार्क में, शनिवार वाड़ा की गलियों में। हर मुलाकात के साथ प्यार गहरा ह...