प्रेम का अंजाना सफर – तीसरा भाग |

 पुणे की बारिश उस रात कुछ ज्यादा ही तेज थी। खिड़की के बाहर बिजली चमक रही थी और कमरे के अंदर हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी। आरुषि सोफे पर चुप बैठी थी, उसके हाथ काँप रहे थे। फोन अभी भी उसके हाथ में था — वही कॉल जिसने उसकी पुरानी दुनिया को फिर से उसके सामने ला खड़ा किया था।

आकाश उसके सामने बैठा था। उसने धीरे से उसका हाथ पकड़ा।

“डरो मत,” उसने शांत आवाज़ में कहा। “अब तुम अकेली नहीं हो।”

आरुषि ने उसकी ओर देखा। उसकी आँखों में डर था, लेकिन साथ ही एक उम्मीद भी। शायद पहली बार उसे लगा कि कोई सच में उसके साथ खड़ा है।

“तुम नहीं जानते आकाश… वो लोग कितने खतरनाक हैं,” उसने धीमे स्वर में कहा। “जो लड़कियाँ Escort Services in Pune छोड़ना चाहती हैं, उन्हें आसानी से जाने नहीं दिया जाता।”

आकाश कुछ पल चुप रहा। फिर बोला, “हर इंसान को अपनी जिंदगी बदलने का हक है। और मैं तुम्हें वापस उस अंधेरे में नहीं जाने दूँगा।”

उस रात दोनों देर तक जागते रहे। बाहर बारिश हो रही थी और अंदर दो लोग अपने टूटे हुए अतीत को जोड़ने की कोशिश कर रहे थे।

अगले दिन आकाश ने एक फैसला लिया।

वह आरुषि को शहर की भीड़ से दूर ले जाना चाहता था, कुछ दिनों के लिए। उसने पुणे के बाहर एक छोटा सा रिसॉर्ट बुक किया, जहाँ सिर्फ हरियाली, पहाड़ और शांति थी।

जब वे वहाँ पहुँचे, तो आरुषि लंबे समय बाद खुलकर मुस्कुराई।

“यह जगह कितनी शांत है,” उसने कहा।

“बिल्कुल तुम्हारी तरह,” आकाश ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

दोनों शाम को झील के किनारे बैठे। हवा में मिट्टी की खुशबू थी और दूर पहाड़ों के पीछे सूरज डूब रहा था। आरुषि ने अपना सिर आकाश के कंधे पर रख दिया।

“क्या तुम्हें कभी डर नहीं लगता?” उसने पूछा।

“लगता है,” आकाश बोला। “लेकिन प्यार शायद वही है… जब डर के बावजूद इंसान किसी का हाथ नहीं छोड़ता।”

उसकी बात सुनकर आरुषि की आँखें भर आईं। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी जिंदगी में ऐसा पल भी आएगा, जहाँ कोई उसे उसके अतीत से नहीं, उसके दिल से पहचानेगा।

धीरे-धीरे दिन गुजरने लगे।

आकाश ने अपने एक दोस्त की मदद से आरुषि के लिए एक छोटा बुटीक शुरू करवाने की योजना बनाई। आरुषि को हमेशा से डिजाइनिंग का शौक था। वह कपड़ों के स्केच बनाती थी, रंगों के साथ खेलना उसे पसंद था।

“क्या सच में मैं यह कर सकती हूँ?” उसने हिचकिचाते हुए पूछा।

“तुम सब कर सकती हो,” आकाश ने कहा। “तुम सिर्फ अपने अतीत से खुद को कम मत समझो।”

कुछ हफ्तों बाद, उन्होंने शहर में एक छोटी सी दुकान किराए पर ली। दीवारों पर हल्के रंग, छोटी-छोटी लाइट्स और आरुषि के डिजाइन किए कपड़े। दुकान का नाम था — “नई सुबह।”

दुकान के पहले दिन आरुषि बहुत नर्वस थी।

लेकिन जब पहली ग्राहक ने उसके डिजाइन की तारीफ की, तो उसकी आँखों में चमक आ गई। वह एहसास किसी भी पैसे से ज्यादा बड़ा था।

उसी रात, दोनों दुकान बंद करके सड़क किनारे चाय पी रहे थे।

“जानते हो,” आरुषि ने मुस्कुराते हुए कहा, “पहले लोग मुझे सिर्फ Pune Call Girl या Escort Girl के नाम से जानते थे। लेकिन आज किसी ने मुझे ‘डिजाइनर मैम’ कहा।”

आकाश हँस पड़ा।

“क्योंकि अब तुम वही हो।”

लेकिन जिंदगी अभी पूरी तरह आसान नहीं हुई थी।

एक शाम दुकान बंद करते समय आरुषि ने देखा कि सामने वही पुलिस वाला खड़ा था, जिसने उसे धमकी दी थी। उसकी आँखों में पुरानी घमंड भरी मुस्कान थी।

“बहुत जल्दी बदल गई जिंदगी तुम्हारी,” उसने ताना मारा।

आरुषि डर गई, लेकिन इस बार उसने नजरें नहीं झुकाईं।

“हाँ,” उसने आत्मविश्वास से कहा। “क्योंकि अब मैं किसी की मजबूरी नहीं हूँ।”

तभी आकाश वहाँ आ गया। उसने आरुषि का हाथ पकड़ लिया और शांत लेकिन सख्त आवाज़ में कहा—

“अगर आपने इसे फिर परेशान किया, तो इस बार मामला सीधे कोर्ट तक जाएगा।”

पुलिस वाला कुछ पल उन्हें घूरता रहा, फिर बिना कुछ बोले चला गया।

आरुषि की साँसें तेज थीं। आकाश ने उसकी ओर देखा।

“सब ठीक है?”

उसने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया।


उस रात पहली बार उसे महसूस हुआ कि वह सच में अपने अतीत से बाहर निकल रही है।

कुछ महीनों बाद “नई सुबह” पुणे में मशहूर होने लगी। लोग उसके डिजाइन पसंद करने लगे। आरुषि अब आत्मविश्वास से भरी हुई लड़की बन चुकी थी।

एक रात दोनों उसी होटल की बालकनी में खड़े थे, जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी।

नीचे शहर की रोशनियाँ चमक रही थीं।

“अगर उस रात मैं यहाँ नहीं आती…” आरुषि ने धीरे से कहा।

“तो शायद मैं जिंदगीभर अधूरा रहता,” आकाश ने उसकी बात पूरी की।

आरुषि मुस्कुराई और उसका हाथ थाम लिया।

कभी-कभी जिंदगी सबसे खूबसूरत मोड़ वहीं देती है, जहाँ इंसान उम्मीद छोड़ चुका होता है।

और उनके लिए, वह अंजाना सफर अब एक नई जिंदगी बन चुका था।

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