प्रेम का अंजाना सफर – भाग 4
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पुणे की रात उस दिन बेहद शांत थी। शहर की भागती सड़कों पर हल्की बारिश की बूंदें चमक रही थीं। “नई सुबह” बुटीक की खिड़कियों से आती पीली रोशनी दूर तक दिखाई दे रही थी। आरुषि देर रात तक अपने नए डिज़ाइन्स पर काम कर रही थी, जबकि आकाश उसके लिए कॉफी बना रहा था।
कुछ महीनों पहले तक यही शहर उसे सिर्फ एक अलग पहचान से जानता था। लोग उसे Escort Services in Pune और Call Girls Services in Pune जैसी दुनिया से जोड़कर देखते थे। लेकिन अब वही लड़की अपने सपनों को नया नाम दे रही थी।
आकाश कॉफी लेकर उसके पास आया।
“इतनी रात तक काम?” उसने मुस्कुराकर पूछा।
आरुषि ने हल्की मुस्कान दी।
“जब सपने पूरे होने लगते हैं ना… तब नींद कम हो जाती है।”
आकाश उसे देखता रह गया। पहले उसकी आँखों में डर होता था, लेकिन अब उनमें आत्मविश्वास था।
उसी समय उसका फोन बजा।
स्क्रीन पर अनजान नंबर था।
आरुषि का चेहरा अचानक बदल गया। उसने कॉल रिसीव नहीं की।
“कौन था?” आकाश ने पूछा।
“शायद अतीत…” उसने धीमे से कहा।
कुछ देर बाद फिर वही नंबर फ्लैश हुआ। इस बार एक मैसेज आया—
“तुम चाहो या नहीं, लोग तुम्हें कभी भूलने नहीं देंगे।”
उसके हाथ काँपने लगे।
आकाश ने फोन लेकर बंद कर दिया।
“बस बहुत हुआ,” उसने सख्त आवाज़ में कहा। “अब कोई तुम्हें डराकर तुम्हारी जिंदगी कंट्रोल नहीं करेगा।”
आरुषि चुप रही। उसे डर सिर्फ उन लोगों से नहीं था, बल्कि उन यादों से भी था जो उसने पीछे छोड़ने की कोशिश की थी।
उस रात बारिश बहुत तेज थी। दोनों बालकनी में खड़े शहर की रोशनियाँ देख रहे थे।
“क्या तुम्हें कभी लगता है कि मैं सच में बदल पाई हूँ?” आरुषि ने अचानक पूछा।
आकाश उसकी तरफ मुड़ा।
“तुम्हें पता है लोग क्यों नहीं बदल पाते?” उसने कहा।
“क्योंकि वो खुद पर भरोसा खो देते हैं। लेकिन तुमने अपने डर से लड़कर नई जिंदगी बनाई है।”
उसकी आँखें नम हो गईं।
“लेकिन लोग हमेशा मुझे उसी नाम से याद करेंगे…”
आकाश ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“लोगों की याद से ज्यादा जरूरी तुम्हारी सच्चाई है।”
अगले दिन आकाश उसे शहर के बाहर एक छोटे से फैशन इवेंट में ले गया, जहाँ स्थानीय डिज़ाइनर्स को मौका दिया जा रहा था। आरुषि बहुत नर्वस थी।
“अगर लोगों को मेरे डिज़ाइन पसंद नहीं आए तो?” उसने पूछा।
आकाश हँसा।
“तुम्हें अंदाज़ा भी नहीं है कि तुम कितनी टैलेंटेड हो।”
इवेंट शुरू हुआ। मॉडल्स ने जब उसके डिज़ाइन पहने, तो लोगों की नजरें वहीं रुक गईं। तालियों की आवाज़ पूरे हॉल में गूँज उठी।
आरुषि की आँखों में चमक आ गई।
एक पत्रकार उसके पास आया और बोला—
“आपकी डिज़ाइनिंग में बहुत इमोशन है। आपने यह सब कहाँ सीखा?”
आरुषि कुछ पल चुप रही। फिर मुस्कुराकर बोली—
“जिंदगी से।”
उस पल उसे एहसास हुआ कि अब उसकी पहचान उसका अतीत नहीं, उसका हुनर बनने लगा है।
इवेंट खत्म होने के बाद दोनों पुणे की सड़कों पर देर रात तक घूमते रहे। बारिश रुक चुकी थी और हवा में मिट्टी की खुशबू थी।
“जानते हो,” आरुषि ने कहा,
“पहले मुझे लगता था मेरी जिंदगी सिर्फ अंधेरे में खत्म होगी। लेकिन अब लगता है जैसे मुझे नई सुबह सच में मिल गई।”
आकाश मुस्कुराया।
“क्योंकि तुमने खुद को हारने नहीं दिया।”
चलते-चलते वे उसी होटल के सामने पहुँच गए जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी।
दोनों कुछ देर वहीं खड़े रहे।
“अगर उस रात मैं तुमसे नहीं मिलती…” आरुषि ने धीरे से कहा।
“तो शायद मैं जिंदगीभर अधूरा रहता,” आकाश ने उसकी बात पूरी की।
आरुषि हल्का हँसी। उसकी आँखों में अब डर कम और प्यार ज्यादा था।
उसने धीरे से कहा—
“तुमने मुझे सिर्फ प्यार नहीं दिया… तुमने मुझे मेरी असली पहचान दी।”
आकाश ने उसका हाथ थाम लिया।
पुणे की रात फिर से चमक रही थी। लेकिन इस बार उनके दिलों में कोई डर नहीं था।
उनका अंजाना सफर अब सिर्फ दर्द की कहानी नहीं रहा था। वह उम्मीद, भरोसे और नए जीवन की कहानी बन चुका था।
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